
Korean Love Game Leads to Death: गाजियाबाद में एक चौंकाने वाली और सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां एक ही परिवार की तीन नाबालिग बहनों की मौत एक कोरियन गेम की वजह से हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, तीनों बहनें टास्क-बेस्ड ‘कोरियन लवर गेम‘ की आदी हो गई थीं। इसी वजह से तीनों बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस को नाबालिगों के कमरे से आठ पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस ने पूरी डायरी अपने कब्जे में ले ली है। बताया जाता है कि इस गेम का अंतिम लक्ष्य आत्महत्या करना है। लोग इस बात से बेहद दुखी हैं कि तीनों बहनों की जान इस गेम के कारण चली गई।
तीन बेटियों की आत्महत्या से व्याकुल पिता का दुख
‘माफ़ कीजिए, हम कोरिया नहीं छोड़ सकते। कोरिया हमारी जान है। हम इसे नहीं छोड़ सकते…’ एक पिता अपनी तीन बेटियों के आत्महत्या करने से पहले कहे गए आखिरी शब्दों को याद करते हुए भावुक हो गए। गाजियाबाद की भारत सोसाइटी की नौवीं मंजिल पर रहने वाले चेतन ने अपनी दुनिया खो दी है। एक Korean Love Game ने उनसे सब कुछ छीन लिया है। उनकी तीनों बेटियों ने गेम के जाल में फंसकर आत्महत्या कर ली।
मीडिया से बात करते हुए चेतन ने कहा, “मैंने पुलिस के पास बेटियों का आखिरी सुसाइड नोट देखा। उसमें लिखा था, ‘पापा, मुझे माफ कर दो।’ आँखों में आँसू लिए चेतन ने हर माता-पिता से अपने बच्चों को इस खेल से दूर रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह बहुत बुरा है। ऐसा किसी के बच्चे के साथ नहीं होना चाहिए। बच्चों, यह खेल खेलना बंद करो। मैं हर माता-पिता से आग्रह करता हूँ कि वे अपने बच्चों को यह खेल न खेलने दें। हमें नहीं पता कि खेल में कोई टास्क कब पूरा हो जाएगा। हमें इसके बारे में भी पता नहीं था।”
Korean Love Game बना मौत का गेम
ये लड़कियां किस खेल की आदी थीं? इस सवाल के जवाब में चेतन ने कहा, ‘मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है। कोरिया से एक लिंक आया था। पुलिस के पास फोन है और वे उससे सारी जानकारी निकाल लेंगे। अगर मुझे पता होता कि उन्हें क्या काम सौंपा गया था, तो मैं उन्हें खेल खेलने नहीं देता।’
बच्चों के लिए खतरे की घंटियाँ
निशिका, प्राची और पाखी की मौत (Korean Love Game Leads to Death) इस बात की पुष्टि करती है कि डिजिटल दुनिया में कई खतरे मौजूद हैं और उन पर कोई नियंत्रण नहीं है। ब्लू व्हेल चैलेंज लगभग एक दशक पहले सामने आया था और इसने सरकारों और समाज को ऑनलाइन गेमिंग के काले पक्ष का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया था। हालांकि, दस साल बाद, ऐसा ही एक और गेम आया और गाजियाबाद की तीन बेटियों ने अपनी जान गंवा दी। यह घटना आज फिर से चेतावनी देती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता, जागरूकता और सख्त नियमों की सख्त जरूरत है।