
CJI B R Gavai on Bulldozer Actions: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने विभिन्न राज्य सरकारों के अधिकारियों द्वारा अपराध के आरोपियों के घरों को ध्वस्त करने के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अधिकारियों के इस न्यायिक व्यवहार को चिंताजनक बताया है।
निर्दोष परिवारों को सजा
एएनआई से बात करते हुए न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने कहा कि इस पद्धति का मतलब है कि राज्य सरकार स्वयं निर्णय लेती है कि कौन दोषी है और उन परिवारों को दंडित करती है जिन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
उन्होंने कहा, “जब कोई नागरिक किसी आपराधिक कृत्य में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके परिवार का क्या अपराध है? उनके घर को क्यों ध्वस्त किया जाए? अधिकारी न्यायाधीश की तरह काम नहीं कर सकते।”
हद पार कर रहे अधिकारी – CJI B R Gavai
बुलडोजर मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप को याद करते हुए CJI B R Gavai ने कहा, “अधिकारी हद पार कर रहे हैं। न्यायालय ने हस्तक्षेप तभी किया जब यह पाया गया कि बिना किसी नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के घरों को ध्वस्त किया जा रहा था। इस तरह की कार्रवाई न केवल अभियुक्त के अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहनों, बच्चों और अन्य सभी निर्दोष लोगों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करती है। यह कानून को अपने हाथ में लेने के अलावा और कुछ नहीं है।”
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकों को बुलडोज़रों द्वारा घरों को अवैध रूप से गिराए जाने के मामलों में तुरंत उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता दी है। न्यायालय ने कड़े सुरक्षा उपाय भी निर्धारित किए हैं और निर्देश दिया है कि कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जा सकता है।
जूता फेंकने की घटना पर रिएक्शन
सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की घटना पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने भी प्रतिक्रिया दी है। बी. आर. गवई ने कहा कि अपनी ही शिक्षा के कारण उन्होंने उस समय आरोपी वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया था।
CJI B R Gavai ने कहा, “शायद यह मेरे पालन-पोषण और संस्कारों का नतीजा है। जब अदालत में यह घटना घटी, तो मुझे पता भी नहीं था कि यह घटना मेरे द्वारा अदालत में दिए गए किसी कथित बयान या टिप्पणी से जुड़ी है। लेकिन उस समय मुझे लगा कि जिस मामले की मैं सुनवाई कर रहा हूँ, उसे जारी रहना चाहिए। इसलिए मैंने उसी क्षण उस वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का फैसला किया।”