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श्रीधर वेम्बू के तलाक में होगा संभवतः 15,000 करोड़ रुपये का खर्च, सबसे महंगा डिवोर्स बनने की संभावना

Sridhar Vembu Divorce Dispute : जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू अपनी अलग रह रही पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के साथ एक हाई-स्टेक तलाक की लड़ाई में उलझे हुए हैं, जिससे उनका निजी जीवन सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि प्रमिला ने सनसनीखेज दावे किए हैं कि उन्होंने उन्हें और उनके ऑटिस्टिक बच्चे को छोड़ दिया था।

Sridhar Vembu Divorce Dispute : पत्नी प्रमिला का आरोप है कि वेम्बू ने भरण-पोषण से बचने के लिए ‘अवैध रूप से’ 47.8% शेयर अपनी बहन को और 35.2% शेयर अपने भाई को ट्रांसफर कर दिए।

स्वदेशी प्रौद्योगिकी कंपनी ज़ोहो के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बू, कैलिफोर्निया में अपनी पत्नी प्रमिला के साथ चल रहे तलाक के मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कैलिफोर्निया की एक अदालत ने श्रीधर वेम्बू को इस मामले में 1.7 अरब डॉलर, यानी लगभग 15,278 करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। यह तलाक (Sridhar Vembu Divorce Dispute) अमेरिका में किसी भारतीय कंपनी के सीईओ के तलाक का सबसे महंगा मामला बनने की संभावना है। हालांकि, श्रीधर वेम्बू के वकील ने दावा किया है कि अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है।

आईआईटी मद्रास से स्नातक होने के बाद, भारतीय कंपनी ज़ोहो के सीईओ श्रीधर वेम्बू ने आगे की पढ़ाई के लिए 1989 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। चार साल बाद, 1993 में, उन्होंने उद्यमी प्रमिला श्रीनिवासन से विवाह किया। श्रीधर वेम्बू ने 1996 में अपने सहयोगियों के साथ एडवेंटनेट नामक एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की और 2009 में इसका नाम बदलकर ज़ोहो कॉर्पोरेशन कर दिया। श्रीधर वेम्बू और प्रमिला श्रीनिवासन लगभग तीन दशकों तक कैलिफोर्निया में रहे। इस दंपति का एक 26 वर्षीय बेटा भी है।

तलाक की कड़वी लड़ाई

Sridhar Vembu Divorce
Sridhar Vembu Divorce

श्रीधर वेम्बू और उनकी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के तलाक का मुख्य कारण ज़ोहो में हिस्सेदारी और संपत्ति की कस्टडी को लेकर विवाद है। इस तलाक में विवाद कैलिफोर्निया में रहते हुए दंपति द्वारा अर्जित वैवाहिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है।

श्रीधर वेम्बू की पत्नी, प्रमिला श्रीनिवासन, अमेरिका में एक शिक्षाविद और व्यवसायी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि श्रीधर वेम्बू उन्हें और उनके बेटे को छोड़कर भारत चले गए। वेम्बू ने उनकी जानकारी या सहमति के बिना एक जटिल लेनदेन के माध्यम से ज़ोहो के शेयर भारत में स्थानांतरित कर दिए। 2019 में, वेम्बू भारत लौट आए और तमिलनाडु में अपने पैतृक गांव मथलमपराई से ज़ोहो का काम संभालने लगे।

फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेम्बू ने अगस्त 2021 में तलाक के लिए अर्जी दी थी। प्रमिला श्रीनिवासन (Zoho Founder Sridhar Vembu divorce) ने आरोप लगाया कि वेम्बू ने कंपनी के अधिकांश शेयर अपनी बहन राधा वेम्बू और भाई शेखर को दे दिए थे। राधा के पास वर्तमान में कंपनी में अनुमानित 47.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि वेम्बू टेक्नोलॉजीज के संस्थापक शेखर के पास 35.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है। श्रीधर वेम्बू के पास केवल पांच प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसकी कीमत 225 मिलियन डॉलर है।

15,278 करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का निर्देश

जोहा के सीईओ श्रीधर वेम्बू ने अपनी पत्नी के सभी आरोपों का खंडन किया। जैसे-जैसे इस मामले पर विवाद बढ़ता गया, श्रीधर वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर मेलचर ने कहा कि प्रमिला श्रीनिवासन के वकील ने कैलिफोर्निया की अदालत को गुमराह किया है। श्रीधर ने अपनी पत्नी प्रमिला को ज़ोहो के 50% शेयर देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वकील ने अदालत के 1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड के आदेश को “अमान्य” बताया और कहा कि इसके खिलाफ अपील की गई है।

इसी बीच, जनवरी 2025 में कैलिफोर्निया सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में न्यायपालिका को वेम्बू (Sridhar Vembu divorce) के लिए 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी 15,278 करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह श्रीनिवासन के वैवाहिक संपत्ति पर संभावित नुकसान से उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक था। अगर श्रीधर वेम्बू और प्रमिला का तलाक होता है, तो यह भारत का सबसे महंगा तलाक माना जा रहा है।

कौन हैं प्रमिला श्रीनिवासन

Sridhar Vembu Divorce
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वर्तमान में, श्रीनिवासन (Who is Pramila Srinivasan) अपने बेटे के साथ सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में रहती हैं। 2007 में, उन्होंने मेडिकलमाइन नामक एक कंपनी की स्थापना की, जो इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और प्रैक्टिस मैनेजमेंट समाधानों पर केंद्रित है।

उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह द ब्रेन फाउंडेशन की संस्थापक भी हैं, जो एक गैर-लाभकारी संस्था है जो ऑटिज्म अनुसंधान, उपचार और सामुदायिक आउटरीच का समर्थन करती है।

ब्रेन फाउंडेशन में उन्हें बोर्ड सदस्य के रूप में लिस्टेड किया गया है, का उल्लेख है कि वह इसके दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए जिम्मेदार हैं, और इसके पार्टिसिपेंट्स र वॉलिंटियर्स की देखरेख करती हैं।

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