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आप नेता सत्येंद्र जैन की बढ़ीं मुश्किलें , ईडी ने जब्त की 7.44 करोड़ रुपये की संपत्ति

Satyendra Kumar Jain ED Case: जांच के दौरान ईडी (Satyendra Kumar Jain ED Case) ने खुलासा किया कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद Satyendra Kumar के करीबी सहयोगी अंकुश जैन और वैभव जैन ने इनकम Disclosure स्कीम (आईडीएस) के तहत एडवांस टैक्स के रूप में बैंक ऑफ बड़ौदा की भोगल ब्रांच ( Satyender Jain Corruption Case) में 7.44 करोड़ रुपये कैश जमा किए थे

Satyendra Kumar Jain ED Case: दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईडी ने उनकी कंपनियों की 7.44 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (पीएमएलए) के तहत की गई। ईडी की जाँच सीबीआई की एक प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र जैन ने फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच, जब वे मंत्री थे, अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

Satyendra Kumar के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

सीबीआई इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। सीबीआई ने सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि जैन ने 14 फरवरी, 2015 से 31 मई, 2017 तक दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। सीबीआई ने इस मामले में सत्येंद्र जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ 3 दिसंबर, 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था।

Satyendra Kumar Jain ED Case के बारे में

Satyendra Kumar Jain
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इससे पहले ईडी ने 31 मार्च 2022 को सत्येंद्र जैन की कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था और 27 जुलाई 2022 को आरोप पत्र (पीसी) दायर किया था। अदालत ने 29 जुलाई 2022 को इस पीसी का संज्ञान लिया था। जांच के दौरान ईडी (Satyendra Kumar Jain ED Case) ने खुलासा किया कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद Satyendra Kumar के करीबी सहयोगी अंकुश जैन और वैभव जैन ने इनकम Disclosure स्कीम (आईडीएस) के तहत एडवांस टैक्स के रूप में बैंक ऑफ बड़ौदा की भोगल ब्रांच ( Satyender Jain Corruption Case) में 7.44 करोड़ रुपये कैश जमा किए थे।

पीडब्ल्यूडी में भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायत दर्ज

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आप नेता सत्येंद्र जैन (Satyendra Kumar Jain ED Case) पर दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में मंत्री रहते हुए आउटसोर्सिंग के ज़रिए पीडब्ल्यूडी के लिए 17 सदस्यीय सलाहकार दल की नियुक्ति को मंज़ूरी देने का आरोप लगा था। जैन ने ऐसा करके मानक सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की अनदेखी की थी। इसके बाद मई 2019 में सतर्कता विभाग की एक शिकायत के आधार पर जैन के ख़िलाफ़ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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