सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद ट्रंप का पलटवार, अब पूरी दुनिया पर लगाया जाएगा 10% अतिरिक्त टैरिफ
Donald Trump Tariffs : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। इससे अरबों डॉलर की वापसी का रास्ता खुल सकता है और अमेरिकी आयातकों को फायदा हो सकता है।
Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी व्यापार नीति को और सख्त करने का संकेत दिया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में, राष्ट्रपति द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को अमान्य घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद, ट्रम्प ने पूरी दुनिया पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह नया टैरिफ 24 फरवरी को रात 12:01 बजे से लागू होगा और अगले पांच महीनों तक प्रभावी रहेगा। ट्रंप ने कहा कि वह 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत यह कदम उठा रहे हैं। यह धारा राष्ट्रपति को भुगतान संतुलन में गंभीर समस्या होने पर 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देती है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि आईईईपीए कानून राष्ट्रपति को प्रत्यक्ष कर या शुल्क लगाने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं देता है। न्यायालय के अनुसार, कर लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस के पास है। इस फैसले को Donald Trump Tariffs के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
Donald Trump ने क्या कहा?

फैसले के बाद, Donald Trump ने अदालत के निर्णय को “निराशाजनक” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन देशों के लिए अच्छी खबर है जो अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास अभी भी अन्य कानूनी विकल्प हैं जिनके माध्यम से वे टैरिफ नीति को आगे बढ़ा सकते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मौजूदा टैरिफ, जैसे कि धारा 232 और 301 के तहत लगाए गए टैरिफ, लागू रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे और अधिक जांच शुरू करेंगे, ताकि आने वाले महीनों में कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकें।
वैश्विक प्रभाव
इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना है। इससे पहले भी, शुल्क संबंधी घोषणाओं के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी गई है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में, ऐसे उपाय व्यापार संबंधों में तनाव और आर्थिक प्रभाव दोनों को बढ़ा सकते हैं।



