युद्ध के बीच भगवान विष्णु की प्रतिमा को ध्वस्त किए जाने पर थाईलैंड का स्पष्टीकरण, भारत ने जताया था विरोध
Lord Vishnu Statue Demolished Controversy: इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, 'इस कृत्य से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों की हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं में अटूट आस्था है, ऐसे अपमानजनक कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं।'
Lord Vishnu Statue Demolished Controversy: थाईलैंड और कंबोडिया की संवेदनशील सीमा पर थाई सेना द्वारा स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा को हटाए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे विश्वभर के हिंदुओं की आस्था पर हमला बताया है। वहीं, थाईलैंड ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है, ‘यह कदम धार्मिक कारणों से नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों से उठाया गया है।’
क्या है Lord Vishnu Statue विवाद
खबरों के मुताबिक, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच वर्षों से सीमा विवाद चल रहा है। इस विवादित क्षेत्र के ‘चोंग आन मा’ इलाके में भगवान विष्णु की एक प्रतिमा स्थापित थी। थाई सेना ने हाल ही में प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया या हटा दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘इस कृत्य से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों की हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं में अटूट आस्था है, ऐसे अपमानजनक कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं।’ इसके अलावा, भारत ने अपील की है कि दोनों देश इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाए बिना राजनयिक माध्यमों से सीमा विवाद का समाधान करें।
सुरक्षा और आधिकारिक मान्यता का मुद्दा

रिपोर्ट के अनुसार, थाई सरकार और ‘थाई-कंबोडियन बॉर्डर प्रेस सेंटर’ ने आरोपों का खंडन करते हुए निम्नलिखित बातें कही हैं: जिस स्थान पर मूर्ति स्थापित की गई थी, वह धार्मिक स्थल के रूप में रजिस्टर्ड नहीं था। मूर्ति मूल नहीं थी बल्कि बाद में स्थापित की गई थी, जिससे सीमा सुरक्षा को खतरा हो सकता था। थाईलैंड (Lord Vishnu Statue Demolished Controversy) ने जोर देकर कहा कि ‘हम हिंदू धर्म सहित सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन संवेदनशील सीमा पर तनाव कम करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।’
यह उल्लेखनीय है कि थाईलैंड और कंबोडिया (Lord Vishnu Statue Demolished) के बीच यह सीमा विवाद दशकों पुराना है। इससे पहले, दोनों देशों के बीच प्रेह विहार मंदिर को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लंबा विवाद चल चुका है। भारत की चिंता यह है कि दक्षिणपूर्व एशिया में फैले हिंदू-बौद्ध सांस्कृतिक प्रतीक राजनीतिक विवादों का शिकार न बन जाएं।


