क्या ताजमहल-लाल किला भी घोषित होंगे ‘वक्फ’? इस राज्य के हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड को लगाई फटकार
Munambam land dispute : कॉलेज मैनेजमेंट ने बाद में यह ज़मीन वहाँ रहने वाले निवासियों को बेच दी और बिक्री के दस्तावेज़ों में कहीं भी ज़मीन के वक़्फ़ होने का ज़िक्र नहीं था। हालाँकि, लगभग 69 साल बाद 2019 में, केरल वक़्फ़ बोर्ड ने अचानक इस ज़मीन को वक़्फ़ की संपत्ति घोषित कर दिया और इससे पहले की सभी बिक्री को अवैध घोषित कर दिया।
Munambam land dispute : केरल उच्च न्यायालय ने मुनंबम वक्फ भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में केरल वक्फ बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि अगर किसी भी संपत्ति को बिना उचित प्रक्रिया के वक्फ घोषित करने की अनुमति दी गई, तो भविष्य में ताजमहल, लाल किला, विधानसभा भवन या यहाँ तक कि उच्च न्यायालय भवन को भी वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने ‘केरल राज्य बनाम केरल वक्फ संरक्षण बोर्ड’ मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर खतरा
अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि अगर न्यायपालिका ऐसी मनमानी वक्फ घोषणाओं को वैधता प्रदान करती है, तो इससे संविधान के अनुच्छेद 300ए (संपत्ति का अधिकार), अनुच्छेद 19 (व्यापार की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और आजीविका का अधिकार) के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों को ख़तरा पैदा हो सकता है। अदालत ने कहा कि वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है, इसलिए अदालत इसकी जाँच करने के लिए सक्षम है।
क्या है Munambam land dispute

यह विवाद मुनंबम (Munambam land dispute) में 404.76 एकड़ ज़मीन को लेकर है, जिसे 1950 में सिद्दीक सईद नाम के एक व्यक्ति ने फ़ारूक़ कॉलेज को दान में दिया था। समुद्री कटाव के कारण अब यह ज़मीन घटकर 135.11 एकड़ रह गई है। कॉलेज मैनेजमेंट ने बाद में यह ज़मीन वहाँ रहने वाले निवासियों को बेच दी और बिक्री के दस्तावेज़ों में कहीं भी ज़मीन के वक़्फ़ होने का ज़िक्र नहीं था। हालाँकि, लगभग 69 साल बाद 2019 में, केरल वक़्फ़ बोर्ड ने अचानक इस ज़मीन को वक़्फ़ की संपत्ति घोषित कर दिया और इससे पहले की सभी बिक्री को अवैध घोषित कर दिया।
अदालत की सख्त टिप्पणी

पीठ (kerala high court Munambam land dispute) ने कहा कि यह ज़मीन महज़ एक ‘गिफ़्ट डीड’ थी, न कि ‘वक्फ़ डीड’। वक्फ़ बोर्ड ने इसे सिर्फ़ इसलिए वक्फ़ घोषित कर दिया क्योंकि दस्तावेज़ का टाइटल ‘वक्फ़ घोषणा’ था, जबकि यह वक्फ़ बनने के लिए ज़रूरी क़ानूनी शर्तें पूरी नहीं करती थी। अदालत ने वक्फ़ बोर्ड की इस कार्रवाई को ‘दुर्भावनापूर्ण और स्वार्थी’ करार दिया। अदालत ने कहा कि यह कदम साफ़ तौर पर ज़मीन के व्यावसायिक मूल्य में वृद्धि के बाद उठाया गया था, जिसका मक़सद ज़मीन पर नियंत्रण हासिल करना था।

